Sanskrit Department

About

Welcome to the webpage of Department of Sanskrit. This department was started with the establishment of MLSM College in 1976.
It is a single faculty department.
It offers course to undergraduate classes. It relates the students with their culture.


The courses taught in UG Classes are:

Bhartiya Sanskriti
Bhasha-Parichay
Upnishadavam Geeta
Nitti Sahitya
Vyakaran

Scope:

By taking this subject students can seek employment in the field of Jyotish, Aacharya, Teaching, Banking Sector, etc. Students can adopt this subject as an optional subject to Indian Civil Service’s and Provincial services.

Program Outcomes of Sanskrit:-
The program will help you to acquire the following skills as a basis for the study of ancient Indian religion, literature and history through.
• Advanced knowledge of ancient religion, literature and history through the study of Sanskrit text.
• Advanced command of the Sanskrit language through advanced text reading in Vedic Sanskrit.
• Ability to apply relevant theoretical perspective to topics within the field on ancient Indian religion, literature and history through Sanskrit texts.
• Sanskrit studies directed towards relating Indian knowledge systems both to contemporary Indian reality and contemporary western thought.
• Sanskrit is the language of the two great Hindu epics Ramayana and Mahabharata read by people all over the world.
Program Specific Outcomes of Sanskrit:-
Students of all undergraduate general degree programs at the time of graduation will be able to:-
Students distinguish between Vedic Sanskrit and its descendant, classical Sanskrit, however these two varieties are very similar and differ mostly in a some points of phonology, grammar and vocabulary.
Sanskrit is a highly inflected language which uses suffixes, prefixes, infixes and reduplication to form words and to represent grammatical categories. Many of these categories has been last or simplifies in modern Indo-Aryan language. There are numerous sandhi forms.
In Sanskrit “Man” translate to mind and “tra” means to free from. Mantras are used as a tool to free the mind. Sanskrit mantras use seed sounds that create the actual vibration of the world it translate to.
The best part seed sounds don’t have to be said out loud. They may even be more effective when recited silently. To enhance your meditations, you can also visualize the deity which connects to your Mantra or envision healing light while meditating.

List of Courses
Sr. NoCourse CodeCourse Title
1 SKT 1001 पंचतंत्र और व्याकरण
2 SKT 1003 चाणक्य-नीति और व्याकरण
3 SKT 0111/01/02/03 शिक्षा साहित्य तथा व्याकरण
4 SKT 0151/01/02/03 भाषा परिचय
5 SKT 0111/01/02/03 शिक्षा श्रीमदभगवद गीता और व्याकरण
6 SKT 0105 भारतीय संस्कृति
7 SKT 111 उपनिषद एवम गीता
8 SKT202 नीति साहित्य
9 DSC-101 संस्कृत गद्य
10AECC-111 उपनिषद एवम गीता
11DSC-201 संस्कृत गद्य साहित्य
12DSC-202 नीती साहित्य
13AECC-211 व्याकरण और अनुवाद
14DSC-301 संस्कृत नाटक
15AECC-302 आयुर्वेद के मूल सिद्धान्त
16DSC-401 संस्कृत व्याकरण
17DSC-402 (MIL) व्याकरण एवम संयोजन
18AECC-403 पांतजल योगसूत्र
19AECC-501 भारतीय रंगशाला
20DSE-502 व्यक्तित्व विकास का भारतीय द्रिष्टिकोण
21GE-503 संस्कृत छंद एवम गायन
22AECC-601 कंप्यूटर अवेयरनेस फॉर संस्कृत
23DSE-602 साहित्यिक समालोचन
24GE-603 भाषा विज्ञान के मूलभूत सिद्धान्त

SCHEME  FOR  CBCS  SYSTEM  IN  SANSKRIT:-

 

Core Course (12)

Ability Enhancement Compulsory Course (AECC) (2)

Ability Enhancement Elective Course/ Skill

Discipline Specific Elective DSE (4)

Generic Elective GE (2)

Semester I

English/Hindi/MIL -1 Skt-DSC-101

संस्कृत काव्य

DSC-II A 

(

(English Hindi/MIL Communication) Environmental Science  SKT-AECC-111

उपनिषद एवम गीता

 

 

 

Semester II

Hindi/MIL-1 Skt-DSC-202

नीति साहित्य

Skt-DSC-201

संस्कृत गद्य काव्य

 

DSC-II B

Environmental Science/ (English/Hindi/MI L Communication)  SKT-AECC-211

व्याकरण और अनुवाद

 

 

 

Semester III

Englihs/Hindi/MIL -2

SKT-DSC-301

संस्कृत नाटक

DSC-II C

 

 

SKT-AEEC-302

आयुर्वेद के मूल सिद्धान्त

 

 

Semester IV

Hindi/MIL/  SKT-DSC-402

व्याकरण एवम संयोजन

SKT-DSC-401

संस्कृत व्याकरण

DSC- II D

 

SKT-AEEC-403

पांतजल योगसूत्र

 

 

Semester V

 

 

SKT-AEEC-501

भारतीय रंगशाला

SKT-DSE-502

व्यक्तित्व विकास का भारतीय द्रिष्टिकोण

SKT-GE503

संस्कृत छंद एवम गायन

Semester VI

 

 

SKT-AEEC-601 Computer awareness for Sanskrit

SKT-DSE-602

साहित्यिक समालोचन

DSC-2 B

भाषा विज्ञान के मूलभूत सिद्धान्त

Course Outcomes of the Courses :-

Sr. No

Course Code

Course Title

Outcomes

1

SKT-1001

पंचतंत्र और व्याकरण

·         पंचतंत्र को पढ़कर विद्यार्थी व्यवहारिक वस्तुओं के बारे में जान पाएंगे |

·         पंचतंत्र की कहानिया विद्यार्थियों को नीति - निपुण और व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर  उसे अपने जीवन में प्रयोग कर  सकेगें |

·         व्याकरण पढ़कर विद्यार्थी संज्ञा शब्द और सर्वनाम शब्दों का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         विद्यार्थी अनुवाद करने में सक्षम होगें |

2

SKT 1003

चाणक्य-नीति  और व्याकरण

·         विद्यार्थी चाणक्य नीति पढ़कर राजनैतिक ज्ञान और नेतृत्व ज्ञान प्राप्त कर उसे अपने जीवन में समावेशित कर सकते है |

·         विद्यार्थी सन्धियों का ज्ञान प्राप्त करके सन्धि करने और सन्धि विच्छेद करने में सक्षम होगें |

·         कारक प्रकरण पढ़कर कारको का ज्ञान प्राप्त करके यह जान सकेगें कि वाक्य किस प्रकार बनते है और हिंदी से संस्कृत में अनुवाद करने में सक्षम होगें |

3

SKT 0111/01/02/03

शिक्षा साहित्य तथा व्याकरण

·         विद्यार्थी पाणिनीय शिक्षा को पढ़कर उच्चारण -स्थान , प्रयत्न , स्वर काल, सन्धि के विषय में ज्ञान अर्जित करेगें |

·         विद्यार्थी इसे पढ़कर भाषा की अच्छी तरह समझ पायेगें क्योंकि किसी भाषा को जानने के लिए व्याकरण का ज्ञान होना जरुरी है |

·         पंचत्रंत की कहानिया पढ़कर विद्यार्थी उसकी शिक्षा को अपने व्यवहारिक जीवन में प्रयुक्त कर सकेगें क्योंकि पंचत्रंत की   को नीति-निपुण बनाने के लिए हुई है |

4

SKT 0151/01/02/03

भाषा परिचय

·         भाषा परिचय को पढ़कर विद्यार्थी ध्वनि के पक्ष, ध्वनि के भेद का ज्ञान प्राप्त कर इनका प्रयोग करने में सक्षम होना जायेगें |

·         भाषा की व्यवहारिक कोटियां जैसे-लिंग, वचन,पुरुष,कारक,क्रिया काल और वाच्य का ज्ञान अर्जित कर भाषा - प्रयोग करने में सक्षम होगें |

·         भाषा परिवर्तन के कारणों को ज्ञान पायेंगें की किस प्रकार एक भाषा परिवर्तित होकर विकास को प्राप्त करती है |

·         विद्यार्थी भाषा और वाक्  में अंतर स्पष्ट कर सकेगें |

·         वाक् के विभिन्न रूपों का ज्ञान अर्जित करेगें |

·         वैदिक संस्कृत की अक्षुष्णता के कारणों को जान पायेगें |

5

SKT 0111/01/02/03

शिक्षा श्रीमदभगवद गीता और व्याकरण

·         पाणिनीय शिक्षा को पढ़कर विद्यार्थी स्वर,वर्ण,काल,उच्चारण स्थानों और प्रयत्नों से अवगत होगें |

·         व्याकरण पढ़कर विद्यार्थी शब्द रूप,धातुरुप गणना का ज्ञान प्राप्त करगें |

·         सूक्तियों के अर्थ को समझते हुए दैनिक जीवन में उनका प्रयोग करेंगे | गीता के रहस्यों को जानने  में सक्षम होगें

·         विद्यार्थी आत्मा,कर्म और ब्रहमसविती का ज्ञान प्राप्त करेगें | विद्यार्थी गीता पढ़कर निष्काम कर्म और सकाम कर्म का ज्ञान अर्जित करेंगे |

6

SKT 0105

भारतीय संस्कृति

·         भारतीय संस्कृति को पढ़कर अपने संस्कारो,कर्म,अहिंसा,परोपकार,वर्णाश्रम व्यवस्था,पुरुषार्थ-चतुशीय,धर्म,गुरुशिक्षा परम्परा के विषय में ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         विद्यार्थी संस्कारो को अपने व्यवहारिक जीवन में प्रयोग करने में सक्षम होंगे|

·         वे प्राचीन शिष्य परम्परा को पढ़कर इस बात से अवगत हो सकेगें की प्राचीन समय में शिक्षा किस प्रकार प्राप्त की जाती थी |

·         भारतीय  पढ़कर विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत होगी | भारतीय संस्कृति विश्व शांति का उपदेश देती है |

7

SKT 111

उपनिषद एवम गीता

·         Students will learn how to unlock the secrets of this powerful scripture.

·         Students will know how to recognise the interbattle of life and make the effort that will with it.

·         Students will know how the law of karma works including the effects of vasanas and sanskaras.

·         How to overcome desire, anger and attachment.

·         How to deepen your relationship with God.

·         It relates them Hindu Dharm and God Prayers.

·         Upnishad can provide knowledge of sarishti, Karma, Ishwar, Bramha and Aatma.

8

SKT202

नीती साहित्य

·         विद्यार्थी नीतिशकतम को पढ़कर आचरण,व्यवहार और औचित्य में निपुण हो जायेगें |

·         पंचतंत्र की कहानिया पढ़कर विद्यार्थियों के मनोरंजन के  साथ-2 अच्छी शिक्षा प्राप्त ककर उसे जीवन में प्रयोग लाने में सक्षम होगें |

·         महाकाव्यों के बारे में पढ़कर उससे सम्बन्धित कवियों के जीवन-वृत्त,कृतित्व और उनके ग्रंथो के ज्ञान से अवगत होगें |

·         गद्यकाव्य के विषय में पढ़कर गद्यकारों और गद्य रचनो का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         नाटकों को पढ़कर और उनके नाटकारो के बारे में ज्ञान प्राप्त करेगें | नाटक मनोरंजन के साथ-2 रास निष्पत्ति,भाषाशैली,शिक्षा आदि ज्ञान प्राप्त करेगें

9

DSC-101

संस्कृत गद्य

इस विषय का अध्ययन विद्यार्थी को अग्रिम पाठ्यक्रम व साहित्य को पढ़ने के लिए आधार भूमि प्रदान करेगा जिससे विद्यार्थी :-

·         कवियों और उनके काव्यों से परिचित होगें तथा राजाओं एवम उनकी राज्य की नीतियों के बारे में ज्ञान प्राप्त करेंगे |

·         नीतिशतकम को पढ़कर बच्चे नीतियों से परिचित होगें तथा रचनाकारों के बारे में तथा उनकी कृतियों के बारे में ज्ञान अर्जित करेगें |

10

AECC-111

उपनिषद एवम गीता

 

11

DSC-201

संस्कृत गद्य साहित्य

·         शुकनासोपदेश को पढ़कर उस समय के समाज,राजनैतिक विचार तथा सूक्तियों के अर्थ एवं उपयोगिता से परिचित होगें |

·         शिवराजविजयम को पढ़कर गद्य सौष्ठव,कथा वास्तु,घटनाक्रम का समय निर्धारण का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         गद्यकाव्य के उदभव एवं विकास को पढ़कर गद्यकारो के विषय में और उनकी कथाओं का ज्ञान अर्जित करेगें |

12

DSC-202

नीती साहित्य (MIL)

 

13

AECC-211

व्याकरण और अनुवाद

·         स्वर सन्धि और व्यंजन सन्धि को पढ़कर सन्धि को पढ़कर सन्धि एवं संधिविच्छेद करने में सक्षम होगें |

·         समास एवं विभक्ति प्रकरण पढ़कर समास विग्रह तथा वाक्य रचना का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         लघु निबन्ध लिखने में सक्षम होगें |

14

DSC-301

संस्कृत नाटक

·         नाटकों के उदभव एवं विकास तथा संस्कृत नाट्यशास्त्रीय पारिभाषिक शब्दावली से परिचय होगें |

·         नाटकों को पढ़कर नाटकों की कथावस्तु,काव्यसौष्टव तथा घटनाक्रम का समय समय निर्धारण एवं प्रकृति का मानवीकरण का ज्ञान प्राप्त करेगें |

15

AECC-302

आयुर्वेद के मूल सिद्धान्त

·         आयुर्वेद का परिचय,औषधि विज्ञान का चरक पूर्वकालीन इतिहास का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         चरकसहिंता को पढ़कर षडरितियों के काल-विभाग तथा शरीर एवं प्रकृति को अवस्था से परिचित होगें |

·         तैत्तिरीयोपनिषद की भृगुवल्ली से परिचित होगें |

 

16

DSC-401

संस्कृत व्याकरण

·         संज्ञा प्रकरण का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         स्वरसन्धि,व्यंजन संधि तथा विसर्ग संधि को पढ़कर संधि एवं संधि विच्छेद करने में सक्षम होगें |

·         विभक्ति प्रकरण को पढ़कर वाक्य रचना करना सीखेंगे |

17

DSC-402 (MIL)

व्याकरण एवम संयोजन

·         स्वरसन्धि,व्यंजन सन्धि विसर्ग सन्धि को पढ़कर सन्धि तथा सन्धिविच्छेद करने में सक्षम होगें |

·         समास एवं कृत्य प्रयत्यो का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         गद्य लेखन तथा अनुवाद करने का ज्ञान प्राप्त करेगें |

18

AECC-403

पांतजल योगसूत्र

·         पांतजल योगसूत्र को पढ़कर समाधि का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         साधन पाद तथा विभूतिपाद से परिचित होगें |

19

AECC-501

भारतीय रंगशाला

·         भारतीय रंगशाला का इतिहास एवं परम्परा तथा इसके निर्माण एवं प्रकारो को पढ़कर इनसे परिचित होगें |

·         अभिनय,वास्तु,नेता तथा रास के बारे में ज्ञान प्राप्त करेगें |

20

DSE-502

व्यक्तित्व विकास का द्रिष्टिकोण

·         ऐतिहासिक द्रिष्टिकोण  के बारे में हमारे वेदो तथा उपनिषदों में क्या कहा गया है इससे परिचित होगें |

·         व्यक्ति की अवधारणा तथा व्यक्तित्व के प्रकारो का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         व्यवहार सुधार  के मापदण्डो के बारे में जान सकेंगे |

21

GE-503

संस्कृत छंद एवम गायन

·         छंद शास्त्र का ज्ञान प्राप्त क्र चाँदो के प्रकार और तत्त्व को जान्ने में सक्षम होगें |

·         वैदिक छंदो का विश्लेषण और गान पद्धति का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         शास्त्रीय छंदो का विश्लेषण तथा गान पद्धति का ज्ञान अर्जित करेगें |

22

AECC-601

कंप्यूटर अवेयरनेस फॉर संस्कृत

·         इससे विद्यार्थी कंप्यूटर के बारे में जागृत होगें |

·         उन्हें कंप्यूटर की प्राथमिक जानकारी प्राप्त होगीं |

·         वे इससे कंप्यूटर के विभिन्न कार्यक्रमों के  होगें |

·         वे संस्कृत भाषा के अनुसार कंप्यूटर का उपयोग करना सीखेंगे |

23

DSE-602

साहित्यिक समालोचन

·         काव्य प्रकाश को पढ़कर काव्य वैष्विष्ट्य,काव्य प्रयोजन,काव्यहेतु,का ज्ञान प्राप्त करेंगें |

·         शब्द शक्तियों का ज्ञान अर्जित करेगें |

24

GE-603

भाषा विज्ञान के मूलभूत सिद्धान्त

·         भाषा विज्ञान और भाषाओं के वर्गीकरण का ज्ञान प्राप्त करेगें |

·         ध्वनिविज्ञान,स्वरविज्ञान,रूपविज्ञान और अर्थ विज्ञान को जान पायेगें |

·         वाक्य रचना के विषय में पढ़कर वाक्य रचना करने में सक्षम होगें | 

Faculty

Teaching Staff

Name : Dr. Ranjana

Email : drranjnathakur8@gmail.com

Mobile No. : 9418806164

Qualification : M.A., M.Phil., Ph. D.

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